2048 तठमà¤à¤²à¤¿à¤¯à¥ à¤à¤¾ वà¥à¤¶à¤¿à¤µà¤ पतन

Last Updated On: 28/08/2014
 

२०४८ तक मछली प्रजातियों का वैश्विक अन्त :-

एक अध्ययन में पता चला कि पहले ही २९% मछली प्रजातियों का अन्त हो चूका है, और अत्यधिक मछली पकड़ने के कारण तथा उनके निवास स्थान खत्म होने के कारण समुद्री आहार में गिरावट आने की संभावना है|

यदि वैज्ञानिकों द्वारा दिए गए डाटा का विश्लेषण किया जाए तो पता चलता है कि समुद्री जीव विविधता – समुद्री मछली, शैल फिश, पक्षी पौधे सूक्ष्म जीव आदि पहले ही २९% कम हो चुके हैं| वैज्ञानिकों ने अनुमान लगाया है कि २०४८ तक सभी प्रजातियों का पतन होने की संभावना है तथा अधिकतम उत्पादन का ९०% कम हो जायेगा| यह सभी प्रजातियों जैसे कि मसल्ज ,कलैम्ज ,टूना और स्वोर्ड फिश पर लागू होता है| समुद्र में रहने वाले स्तनपायी जैसे कि सील, कीलर व्हेल और डॉलफिन्स भी प्रभावित होती है| समुद्री जैव विविधता के पतन का मुख्य कारण अत्यधिक मछली पकड़ना और आवासों का नष्ट होना है| जैव विविधता में कमी आने के कारण समुद्री पारिस्थितिक तन्त्र वैश्विक जलवायु परिवर्तन, प्रदुषण तथा अत्यधिक शोषण जैसे प्रभावों से उभरने में कम सक्षम रहता है| एक विविध समुद्री पारिस्थितिक तन्त्र की अलग-अलग प्रकार के निवेशों के साथ तुलना की जा सकती है| समुद्र में अनेक प्रकार की प्रजातियों का होना अलग-अलग प्रकार के निवेशों के समान है जिसमें आप जोखिम को बांट देते हैं|