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Last Updated On: 28/08/2014  
 

क्रीडा मछलियाँ

हिमाचल फ्रेश मे हिमनद से उत्पन्न होने वाली अनेक तेज भटई हुई नदियां व धाराएँ है | बर्फीले पानी में विश्व प्रसिद्ध महाशीर तथा विभिन्न प्रकार की कैटफिश व ट्राउट प्रजातियाँ पाई जाती है | प्रत्येक वर्ष  देशी व विदेशी एगंलर राज्य में  मछ्ली पकड़ने के उदेश्य से आते हैं–

गोल्डन महाशीर (Tor Putitora) – गोल्डन महाशीर चट्टानों, झरनों  तथा तालाबों की मछ्ली है | इसके बड़े आकार तथा लड़ने की क्षमता के कारण एगंलार इसे ट्राउट से कहीं बेहतर मानते हैं | मछ्ली ऊपर से हरी, किनारे से हल्की गुलाबी, पेट से चाँदी की तरह सफेद नजर आती है | इसकी ग्रे – नीले या बैंगनी रंग के किन्नरे वाली पट्टियाँ होती है तथा पंख ग्रे- हरे रंग के होते हैं | इसका शरीर संकुचित आयताकार तथा सुव्यवस्थित होता है |

सिर मोटे तौर पर तीखा, होंठ मुंह के कोण के साथ निरन्तरता दर्शाते हैं | सिर की लंबाई मानक लंबाई से 3 से 3.6 गुणा  अधिक है | माहशीर हिमालय की तलहटी मे सिंधु- गंगा मे पाई जाती है | मैनन (1992) भारतीय जलों मे महाशीर की पाँच प्रजातियों के बारे मे निम्नलिखित विशेषताओं के साथ विश्लेषण करते हैं |

टोर –टोर (Tor Tor) लाल पंख विशेष पहचान हैं | सिर शरीर की गहराई की तुलना मे काफी छोटा है | इसमें लेटरल लाईन मे 22-28 स्केल होते है | यह हिमालय की तलहटी मे कश्मीर से असम टीके तथा नर्मदा और ताप्ती नदी मे भी पाई जाती है |

टोर खुदरी (Tor Khudre) – इसे ड्क्कन महाशीर भी कहा जाता है | इसका सिर लगभग शरीर की गहराई के बराबर  है तथा पंख बैंगनी रंग के होते हैं | इनमें लेटरल लाईन मे 24-26 स्केल होते हैं | यह उड़ीसा तथा प्राय-- द्धपीय क्षेत्रों मे पाई जाती हैं |

टोर प्रोजरनियस (Tor Progeneius) :- सिर लगभग शरीर की गहराई के बराबर होता है, परंतु लेटरल लाईन मे 27-31 स्केल होते है | यह उत्तरीपूर्वी नदियों मे कैपर महाशीर (Acrossocheilus hexagonolepis) के साथ पायी जाती है |

टोर कुलर्णी (Tor kularni):- यह गोदावरी मे पायी जाती है | मैनन के अनुसार टोर कुलर्णी टोर खुदरी की बौनी रिश्तेदार है |

ब्राउन ट्राउट :- ब्राउन ट्राउट मध्य तथा पश्चिमी यूरोप के पहाड़ों के जलों की मूल निवासी है वे रूप तथा रंग मे विविधता दर्शाती है | ब्राउन ट्ट्राउट के दो विशिष्ट गुण हैं :-

1     शरीर पर लाल रंग के धब्बे |

2     एडिपोज पंख के किनारे की चोटी लाल रंग की होती है | ट्राउट सालमनेडी परिवार से संबन्ध रखती है की आइसोस्पौंड़िलाई आर्डर के अंतर्गत आता है जिसका अर्थ बराबर कशेरुका (Vertebrae ) होता है | इस समूह की सभी मछलियों मे हवा की एक थैली (Air Bladder) होते है जो न्यूममैटिक (Pneumaitc) नली द्धारा गले से जुड़ी होती है तथा पैल्विक पंख उदर वाले भाग मे होते है | इसे 1899 मे भारत मे लाया गया था , बाद मे हिमाचल प्रदेश उत्तर प्रदेश मे भेजा गया |

रेनबो ट्राउट:- रेनबो ट्राउट अमेरिका की सैक्रिमैंटो नदी की मूल निवकी है , परंतु की देशों ले जलों मे सफलतापूर्वक डाली गई | यह प्रजाति 8’c से 18।सी पानी के तापमान मे सर्वश्रेष्ठ वृद्धि दर्शाती है रेनबो ट्राउट दो प्रकार की होती है –

कॉन्टीनेंटल ट्राउट (Continental Tout):- कॉन्टीनेंटल ट्राउट समुन्द्र मे स्थानांतरित नही होती | इंका शरीर तुलनात्मक रूप मे छोटा  गहरा होता है तथा नर मादा की तुलना मे लंबा होता है, शरीर का रंग आकार, उम्र तथा जल के चरित्र पर आधरित होता है | किनारें चाँदी ज्के समान होते हैं | जिन पर अनियमित गहरे धब्बे तथा लाल पट्टी होती है | पेट बिल्कुल सदा होता है | यह पहली बार कश्मीर मे 1909 में लाई गई और बाद मे हिमाचल प्रदेश और उत्तर प्रदेश में वितरित की गई |

बगैरियल बगैरियल (गूँच) (Bagarius Bagarius)(Goonch):-  यह एक खूबसूरत मछ्ली प्राय: महाशीर जलों मे पाई जाती है | इस मछ्ली में चिपकने की असाधारण शक्ति है तथा कांटे में फँसने के बाद नदी के तल को कसकर पकड़ सकती है | 1988 में पौंग जलाशय में 1.6 मी0 लंबी तथा 112 किलो वजन कि गूँच पकड़ी जा सकती है |

मिस्टस प्रजाति:-  मिस्टस (टेंगरा) बड़ी फिश है जो हिमाचल की नदियों व जलाशय में पाई जाती है , यह लगभग एक मीटर लंबी होती है | इसका शरीर चपटा, सिर दबा हुआ, ऊपरी जबड़ा लंबा, परंतु मुंह का कटाव उथला होता है | सिर के ऊपर मध्य मे एक नली आक्सीपिटिल प्रोसैस तक जाती है | डौरलस स्पाइन से मजबूत होता है | यह मांसाहारी मछलियाँ है तथा मानसून की पहली बौछार के साथ ही नदियों व तालाबों मे प्रजनन करती है |

चन्ना प्रजाति:-  यहाँ आम तौर पर इन्हें सोल कहा जाता है | साँप के समान सिर वाली यह मछलियाँ अधिकतम 1-2 मी0  लंबी होते है तथा प्रायः ताजे पनि के तालाबों, नदियों व जलाशयों मे पाई जाती है | अतिरिक्त श्वसन अंगों के कारण ये किसी भी प्रकार के गंदे पानी मे रह सकती है | इनका शरीर व उप- बेलनाकार होता है तथा साँप जैसे चपटे सिर से लेकर गोलाकार कॉडल पंख तक फेला होता है | शरीर का रंग माध्यम के साथ बदलता है तथा ग्रे- हरे लेकर और हल्के रंगो तक का होता है | युवा मछलियों मे नारंगी लेटरल पट्टी तथा व्यसकों में 5-6 धुंधली पट्टियाँ लेटरल लाइन के नीचे होती है | एक गहरा काला ओसेलस (ocellus)  कॉडल पंख के आधार के पास होता है |

अन्य क्रीडा मात्स्यिकी की मछलियाँ कम महत्वपूर्ण है और हिमाचल प्रदेश के पेशेवर  एंगलरों द्धारा न ही पसंद की जाती है और न ही पकड़ी जाती है | हालांकि स्थानीय लोग या बच्चे इन्हें जीवित चारे द्धारा पकड़ते है |

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