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विषय का नाम: हिमाचल प्रदेश के मंदिरो में बेहतर प्रबंधन के लिए सुझाव

हिमाचल प्रदेश वेब साइट चर्चा मंच की सार्वजनिक राय !


यहाँ तीन बुनियादी बातें हैं - वाहन ड्राइविंग लाइसेंस जारी करने में सख़्ती ,ड्राइविंग लाइसेंस के लिए, उचित प्रशिक्षण लेने के छह महीने के न्यूनतम समय के साथ सख्त परीक्षण होना चाहिए,दोषी के लिए गंभीर सजा ताकि वहाँ गलती ना करने का मजबूत डर रहे - विशेष रूप से जहां तक संभव हो, भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में सड़क में एक भाजक ज़रूर होना चाहिए, आैर केवल एक तरफ़ा यातायात की अनुमति होनी चाहिए। यदि संभव हो तो सड़कों की वीडियो रिकॉर्डिंग भी कि जानी चाहिए ताकि दोषि पकडे जाएं आैर दंडित जा सकें। आैर पकडे जाने का डर उन्हें तेज़ गति से ड्राइव करने के लिए हतोत्साहित करेगा। मैं जो सुझाव दे रहा हूँ इसमें कुछ भी नया नहीं है, सभी विकसित देशों में इनका ठीक से पालन किया जा रहा है, यही कारण है कि वहां दुर्घटनाऐं न्यूनतम हैं और नागरिकों को जीवन नहीं गंवाना पडता। हिमाचल पहले से ही कई बातें पहली बार कर चुका है, इसलिए मुझे लगता है कि हिमाचल को एक और सड़क दुर्घटनाओं में कमी ला कर एक आैर पहल करनी चाहिए।
कई स्थानों पर वायरलेस रडार और वायरलेस कैमरे का उपयोग करके सड़कों की निगरानी बढ़ाएँ। ट्रैफिक पुलिस को उचित नवीनतम उपकरणों के साथ सुसज्जित किया जाना चाहिए , नए संशोधित यातायात नियमों, यातायात सड़कों के उचित हालात, किसी भी तरह के वाहन चालक को उचित प्रशिक्षण की शर्त और मंद बुद्धि, उम्र या किसी अन्य कारण से दृष्टि दोष होने पर धारक के ड्राइविंग लाइसेंस को रद्द कर देना चाहिए। ट्रैफिक पुलिस को मौसमी आधार पर सड़क का हालात परीक्षण करना चाहिए, यदि किसी भी सड़क को अनुचित हालत में पाया गया उस सड़क को असुरक्षित घोषित कर दिया जाना चाहिए और , जब तक अधिकारियों द्वारा यातायात पुलिस की देखरेख में निर्माण विभाग अलावा तीसरे पक्ष के विशेषज्ञ द्वारा लोक सड़क की हालत परीक्षा व उचित मरम्मत नहीं की जाती उस सड़क को ड्राइविंग के लिए प्रतिबंधित किया जाना चाहिए। बिना लाइसेंस और शराब पीते हुए ड्राइविंग के मामले को गंभीर अपराध के रूप में लिया जाना चाहिए आैर मौके पर ही कारावास की सजा हो ना कि केवल भुगतान या चालान। हिमाचल में सभी प्रकार के वाहनों के लिए स्पीड गवर्नर अनिवार्य होना चाहिए।
ट्रैफिक पुलिस को ज्यादा सख्त होने की जरूरत है। हमारे राज्य में लोग सीट बेल्ट, लाल बत्ती आदि नियमों का पालन नहीं करते हैं। कुछ वाहनों से प्रदूषण बहुत है, लेकिन हमारा इस पर कोई नियंत्रण नहीं है। यातायात पुलिस को पर्याप्त गश्त वाहनों के साथ सुसज्जित किया जाना चाहिए। ट्रैफिक लाइट केवल शिमला में ही काम कर रहे हैं।
यह केवल ईमानदार पुलिस अधिकारियों द्वारा जाँच की जा सकती है जो कानून के अनुसार वाहनों का चालान करें न की व्यक्ति के हिसाब से । अधिकांश दुर्घटनाऐं बेकार और गलत पार्किंग करने के कारण होती हैं। जहां पर्याप्त जगह हो उसे पीले रंग की लाइनों द्वारा चिह्नित किया जाना चाहिए और लोगों को सख्ती से इन यातायात नियमों का पालन करना चाहिए अन्यथा बिना किसी चेतावनी के चालान किया जाना चाहिए। जहां कहीं आवश्यक हो पार्किंग की अनुमति दी जानी चाहिए।
व्यक्ति के अनियंत्रित वाहन ड्राइविंग व्यवहार को कानून के प्रवर्तन से कुछ हद तक नियंत्रित किया जा सकता है, लेकिन अगर हम एक व्यापक प्रसार परिवर्तन देखना चाहते हैं, तो, मेरी राय में राज्य में , विशेष रूप से युवाओं और राष्ट्रीय राजमार्ग यात्रियों को लक्षय में रख के, एक अच्छी तरह से तैयार जागरूकता अभियान शुरू करने की जरूरत है ताकि वे यातायात नियमों के उल्लंघन के बुरे और घातक प्रभावों के बारे में जान सकें। प्रमुख हितधारकों जैसे युवा क्लब, ऑटो / कार डीलर्स, गैर सरकारी संगठनों और युवा राजनीतिक मंच, उच्च मार्ग के किनारे पेट्रोल पंपों और खाद्य दुकानों के मालिकों को ट्रैफिक पुलिस के साथ नोडल एजेंसी की भूमिका में अभियान में शामिल होना होगा। अभियान के दौरान नियमों और यातायात नियमों के उल्लंघन के लिए जुर्मानाें का विवरण भी व्यापक रूप से प्रदर्शित और विज्ञापित किया जाना चाहिए ताकि सब लोगों स्पष्ट रूप से पता चले, कि किसी भी तरह के उल्लंघन के लिए जुर्माना लगाया जाएगा। अभियान सुदृढ़ करने के लिए संदेश को एक साल में 2 -3 बार समय-समय पर दिया जाना चाहिए।
1. हमें पहले दुर्घटनाओं और लापरवाही के बीच फर्क करने की जरूरत है। मामले, जहां मालिक या चालक की ओर से लापरवाही का स्पष्ट मामला है, मानवहत्या का मामला पंजीकृत होना चाहिए। 2. हमें अतीत की दुर्घटनाओं से सीखना चाहिए। दुर्भाग्य से हम ऐसा नहीं करते। 3. दुर्घटनाओं के मामले में प्रत्येक कारणों का अध्ययन किया जाना चाहिए और सुधारात्मक कार्रवाई की जानी चाहिए। 4. प्रवर्तन तंत्र बहुत कमजोर है। इसे प्रभावी बनाने के लिए गंभीर सोच आवश्यक है। ड्राइविंग से संबंधित हर चालान ड्राइविंग लाइसेंस में परिलक्षित होना चाहिए। और एक खास स्तर के बाद हमें लाइसेंस रद्द करने की जरूरत है। 5. जहां कहीं सड़क की खराब हालत की वजह से दुर्घटना होती है, पीडब्ल्यूडी को व्याख्या करने की आवश्यकता है। 6. कमजोर वर्ग को शिक्षित करने के लिए आईईसी की बहुत जरूरत है। 7. लाइसेंस जारी करने की प्रक्रिया में संशोधन की जरूरत है। ड्राइवरों को, जिनसे भारी वाहनों को ड्राइव करने की अपेक्षा की जाती है, उचित उन्मुखीकरण दिए जाने की जरूरत है।
जो व्यक्ति यातायात में अनुशासनहीनता बरतते हैं जैसे उच्च गति में ड्राइविंग, बिना लाइसेंस या विशेष रूप से शराब पी के ड्राइविंग के ड्राइविंग, ऐसे व्यक्तियों को सख्ती से सजा दी जानी चाहिए। इन पर भारी जुर्माना लगाया जाना चाहिए ताकि निर्दोष लोगों के जीवन को बचाया जा सके , जो इस तरह के लोगों की लापरवाही के कारण पीड़ित हैं।
यातायात पुलिस कर्मियों को सड़क सुरक्षा के लिए नवीनतम काउंटर उपायों के साथ लैस करने के अलावा,लाइसेंस जारी करने की प्रक्रिया को और अधिक केंद्रीकृत और आधुनिक होना चाहिए। ऑनलाइन परीक्षा शुरू किया गया है जो एक बहुत ही अच्छा उपाय है और ड्राइविंग के लिए आगे ऑनलाइन सिम्युलेटर परीक्षण भी लिया जा सकता है ताकि वहाँ हेरफेर और धोखाधड़ी की बहुत कम संभावना हो । इस तरह के अपराधों के नियमित अपराधियों को निर्धारित अवधि के लिए लाइसेंस रद्द करके दंडित किया जाना चाहिए।
प्रत्येक वाहन में गति नियंत्रक उपकरणों स्थापित किया जाना चाहिए, जब वाहन की गति की सीमा पार करती है, तो डीएसपी, ट्रैफिक हवलदार को एसएमएस जाना चाहिए या अपराधी को डिजिटल चालान जारी किया जाना चाहिए ,1 घंटे के लिए इंजन बंद हाे जाना चाहिए, इतना समय पुलिस पार्टी को मौके पर पहुंचने के लिए पर्याप्त है। ओवरलोडिंग से बचने के लिए चालक लाइसेंस स्थायी रूप से रद्द कर दिया जाना चाहिए।
इसमें कोई भी शक नहीं कि हिमाचल की सड़कें भीड़ भरी हैं के रूप में अन्य राज्यों की तुलना में सरकार की ओर से गंभीर प्रयासों के बावजूद हम हमारे सड़क नेटवर्क को सड़क उपयोगकर्ता की बढ़ती आवश्यकता के अनूरूप विकसित नहीं कर सके हैं, जिसके फलस्वरूप सड़क पर जाम आैर कई अनुशासनिक प्रथाऐं बहुत आम हैं। इसमें कोई शक नहीं कि पुलिस यह जांच करने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है, लेकिन मुझे लगता है कि बेहतर होगा अगर हम ड्राइविंग लाइसेंस जारी करने से पहले पूरी तरह से हमारे ड्राइवरों को प्रशिक्षित करें। स्वयंसेवक शिष्य और संवेदनशीलता तथा समझदारी से सड़क का उपयोग करना ही समय की मांग है। इसके अलावा आरटीओ कार्यालयों में विशेष सड़क सुरक्षा सेमिनारों और कार्यशालाओं का आयोजन किया जाना चाहिए। और अगर ये सभी प्रयास विफल हों, तो अंतिम विकल्प के रूप में पुलिस को कानून तोड़ने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए।
सड़क दुर्घटनाओं को रोकने के लिए सरकार को ड्राइविंग लाइसेंस देने से पहले सख्त मानकों का पालन करना चाहिए। मेरा एक सुझाव है - एक व्यक्ति के रक्तचाप और मस्तिष्क सजगता की जाँच जब वह भीड़, यातायात और खाली सड़क पर तनाव की स्थिति में है , की जानी चाहिए। अगर वह इन हालत में सामान्य रूप से निपटता तो उसे लाइसेंस दें, अन्यथा उसे अस्वीकार करें ।
यातायात पुलिस द्वारा सड़कों पर उल्लंघन करने वालों की नियमित रूप से जाँच की जानी चाहिए। अधिकांश दुर्घटनाऐं बाईकर्स की होती हैं, या आप कह सकते हैं छात्रों की , इसलिए यातायात पुलिस की एक स्थायी चेक पोस्ट हिमाचल में सभी शिक्षण संस्थानों के पास होनी चाहिए। आजकल, राज्य परिवहन भी कुछ दुर्घटनाओं के लिए जिम्मेदार है,इसलिए इसकी हालत में सुधार करने की जरूरत है । विज्ञापन, टीवी, रेडियो विज्ञापन आदि द्वारा सरकार की ओर से जागरूकता अभियान की जरूरत है ।
हिमाचल प्रदेश सरकार को यातायात की अनुशासनहीनता की जाँच करने के बारे में सोचना चाहिए। अगर दृढ़ संकल्प और सकारात्मक दृष्टिकोण न हो तो सभी प्रयास बेकार हो जाते हैं। अगर सरकार, वाहन मालिक और पुलिस विभाग में त्रिकोणीय पक्ष समाधान किया जा सकता हो तो वास्तव में यह अच्छा है।
मेरे विचार में अधिकतम दुर्घटनाऐं चालकों द्वारा लापरवाही के कारण या अन्य राज्य के चालकों द्वारा किया जाती है। सबसे पहले ये सूनिशचि करना चाहिए कि अधिक भार या बिना दसतावेज जैसे कि बिना लाईसैंस कोई भी वाहन राजय में प्रवेश नहीं कर सकता । इसमें कोई शक नहीं कि हमारी पुलिस अच्छा काम कर रही है। पुलिस / परिवहन विभाग द्वारा रैंडम चेकिंग की जानी चाहिए।
पहाड़ी क्षेत्रों में दुर्घटनाओं को कम करने के लिए, सबसे महत्वपूर्ण यह है कि पुलिस विभाग को सूचित कर , विशेष रूप से सार्वजनिक समारोहों के दौरान वाहनों की गति सीमा प्रदर्शन करना चाहिए। वाहन की गति मुख्य आयोजन स्थल, बाजार, स्कूल आदि जैसे भीड़ भरे इलाकों में 20-30 किलोमीटर प्रति घंटे से अधिक नहीं होनी चाहिए।
सरकार को पहले सड़कों को बेहतर बनाना चाहिए। सड़कों की वर्तमान स्थिति तो बहुत बुरी है कृपया इस पर काम करें और दूसरी बात यह कि यातायात नियमों के बारे में जनता को शिक्षित करें।
सबसे पहले वाहनों के चालकों के प्रामाणिक ड्राइविंग लाइसेंस की जांच करना अनिवार्य है। किसी भी व्यक्ति को ड्राइविंग लाइसेंस के बिना वाहन ड्राइव करने के लिए 2 या 3 साल के लिए किसी भी वाहन के चालन पर रोक लगा दी जानी चाहिए। सभी परिवहन चालकों को 2 साल के न्यूनतम निजी वाहन ड्राइविंग का अनुभव होना चाहिए। तभी उनहें पहाड़ी क्षेत्रों में ड्राइव करने के लिए अनुमति दी जानी चाहिए, यह देखा गया है कि सभी दुर्घटनाएें नए ड्राइवरों द्वारा होती हैं।
यह स्वाभाविक है जब हम सड़क पार करने के बारे में बातें करते हैं, अधिकतर यह हमारे अज्ञानता की वजह से खतरनाक है। इसलिए अपने जीवन का ध्यान रखें। यह सब समाज का हिस्सा है, सड़क पार करने से पहले कुछ बातों का ध्यान रखें। कार या बाइक आदि अन्य तरीका है जिसके द्वारा यह घटना हो सकती है, अतः ड्राइवर को चाहिए कि गति, सीमा से अधिक न हो, क्योंकि यह अन्य लोगों के जीवन के लिए है।
सरकार को, सड़कों को बेहतर बनाना होगा। विभागों को वाहनों की गति सीमा प्रदर्शित करने के लिए सूचित करना चाहिए। रैंडम चेकिंग पुलिस / परिवहन विभाग द्वारा रैंडम चेकिंग किया जाना चाहिए। विभाग द्वारा ड्राइविंग लाइसेंस देने से पहले सख्त मानकों का पालन करना चाहिए। टेलीविजन, रेडियो ,होर्डिंग्स आदि के माध्यम से सरकार द्वारा जागरूकता अभियान की जरूरत है। यातायात अनुशासनहीनता जैसे उच्च गति में ड्राइविंग, बिना ड्राइविंग लाइसेंस या, विशेष रूप से शराब पीने के बाद ड्राइविंग, में सख्ती से सजा दी जानी चाहिए। यह बेहतर परिणाम के लिए पर्याप्त होगा। लेकिन महत्वपूर्ण बात यह है कि सख्त नियम हर किसी पर लागू होने चाहिए, चाहे वह एक छोटा सा गांव वाला हो या मुख्यमंत्री हो। तब हिमाचल प्रदेश सबसे अच्छा राज्य होगा।
मैंने देखा है कि लोगों में से अधिकांश को पता है कि कैसे ड्राइव करना है, लेकिन उन्हें यातायात नियमों के बारे में कुछ भी पता नहीं है। सरकार को ये करना चाहिए कि यातायात नियम कक्षाएें / कार्यशालाएें शुरू करें और हर ड्राइविंग लाइसेंस धारक को वहां जाना अनिवार्य होना चाहिए। यह समग्र समाधान नहीं है, लेकिन किसी तरह इससे यातायात दुर्घटनाओं को कम करने में मदद मिलेगी।
सबसे पहले शराब पीकर गाड़ी चलाने के मामलों के लिए नियमित रूप से जांच होनी चाहिए जो दुर्घटनाओं / सड़क अनुशासनहीनता का मुख्य कारण है , दूसरी वैध ड्राइविंग लाइसेंस के बिना नाबालिग चालकों को भारी जुर्माना लगाया जाना चाहिए, तीसरा यहाँ गति सीमा की जाँच कि जानी चाहिए।
सभी सड़कों का पहले अच्छी तरह का निर्माण किया जाना चाहिए और ठेकेदार द्वारा वारंटी दी जानी चाहिए, और उसके बाद वाहनों की गति की जाँच और कुछ क्षेत्रों में अोवरटेकिंग प्रतिबंधित होनी चाहिए। कई बार मैंने देखा है कि ज्यादातर दुर्घटनाओं का कारण अोवरटेकिंग और अधिक गति होता है, खराब सड़कों या किसी भी अन्य कारक के कारण बहुत कम दुर्घटनाएें होती हैं।
वाहनों की गति को नियंत्रित करके, किशोरों को ड्राइव करने की अनुमति न दें और ड्राइविंग के दौरान मोबाइल फोन के उपयोग को कम करने से।
सबसे पहले सड़क की स्थिति में सुधार किया जाना चाहिए और यातायात पुलिस पदों को राजमार्गों के कुछ स्थलों पर सड़कों में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए अनिवार्य किया जाना चाहिए। यात्रियों और माल की ओवरलोडिंग को सख्ती से प्रतिबंधित किया जाना चाहिए।
रात के समय के दौरान उच्च बीम पर एक वाहन ड्राइव करना बहुत आम है और हम इसे बहुत हल्के ढंग से लेते हैं, बल्कि एक वाहन पर अधिक से अधिक लाइट्स लगाना एक फैशन बन गया है। दुर्घटना दर को कम करने के लिए इसे सख्ती से ध्यान में रखा जाना चाहिए। रात में डिपर का प्रयोग करें।
हिमाचल प्रदेश में यातायात दुर्घटनाओं के लिए 5 बुनियादी कारण हैं। 1) नशे में अनियंत्रित ड्राइविंग। पुलिस को एक प्रभावी भूमिका निभानी चाहिए। 2) व्यापक सड़कों में मोड़ों पर अोवरटेकिंग की प्रवृत्ति। सभी अंधे मोड़ों पर डिवाइडर उपलब्ध कर के नियंत्रित किया जा सकती है। 3) सिंगल लेन सड़कों पर ब्लाइंड और संकीर्ण मोड़। इस तरह के मोड़ों के दोनों तरफ स्पीड ब्रेकरों के साथ सड़क अंकन और साइन बोर्ड प्रदान किए जाने चाहिए। 4) सभी सड़कों में घाटी की ओर रेलिंग का अभाव। 5) सड़कों और सड़क चिह्नों के उचित रखरखाव का अभाव।
यह कड़े कानूनों के प्रवर्तन में नहीं है, यह शिक्षा और नैतिक मूल्य है जो कि हर जगह मायने रखते हैं। जब तक लोग अपनी जिम्मेदारियों और उनके जीवन और दूसरों के जीवन के मूल्य को नहीं समझते, इन सड़क दुर्घटनाओं की जांच करना मुश्किल हैं।
सड़क दुर्घटनाएं कम करने के लिए कठोर उपायों की आवश्यकता नहीं है। आवश्यक ये है कि सड़कों पर सड़कों पर अनुशासन पैदा करने के लिए प्रतिबद्धता अाैर अधिक से अधिक निरंतर अभियान हों। हमें राज्य के भीतर वैध सत्ता की संस्कृति का विकास करना चाहिए। इसका मतलब यह है कि हम में सड़कों पर अनुशासनहीनता के लिए शून्य सहिष्णुता होना चाहिए। हम दूसरों के जीवन को खतरे में बस इसलिये नहीं डाल सकते क्योंकि हमें तेज़ गति पसंद हो या इच्छा हो कि जिस जगह पर हम जा रहे हैं, जल्दी से पहु्ॅंच जाएें।
मैंने कई लोगों को विशेष रूप से युवा लड़कों के बिना हेलमेट दोपहिया गाड़ी चलाते देखा है। पड़ोसी राज्यों के साथ हिमाचल की सीमा पर सभी सड़कों पर चेक पोस्ट बनाया जाना चाहिए। बड़ी दुर्घटनाओं और जीवन नुकसान से बचने के लिए पुराने एचआरटीसी बसों की बदल दें। इन बसों के चालकों को दुर्घटनाओं से बचने के लिए पर्याप्त आराम दिया जाना चाहिए। सड़क किनारों पर इस तरह होर्डिंग जैसे, रातों में कम बीम प्रकाश, सुरक्षित ड्राइविंग के लिए मोड़ों के दौरान कोई अोवरटेकिंग नहीं, रखने चाहिए। इसके अलावा सड़क / टोल टैक्स की प्राप्ति की पीठ में नारे और सड़क सुरक्षा नियमों डाल दिया जाए। ट्रक और माल वाहनों में यात्रियों को याञा अनुमति न हो और लोगों को यातायात नियमों का पालन करने के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए।
मुझे लगता है पहली बार स्थानीय बाजारों से यातायात अनुशासन शुरू होना चाहिए । प्रत्येक तहसील और प्रमुख बाजारों में कम से कम 5-6 सीसीटीवी कैमरे लगाने चाहिए। मुझे लगता है कि बड़ी दुर्घटनाएें अन्य कारणों से, उदाहरण के लिए, गलत साइड एंट्री, उतावली ड्राइविंग, उच्च प्रकाश किरण ड्राइविंग आदि से उत्पन्न होती हैं। फिर भारी दंड जैसे , 1000 रूपये - हेलमेट नहीं पहना हो, 1500 रूपये - सीट बेल्ट नहीं पहनी हो, 1000 रूपये - लाल बत्ती पर ना रूके। इसके अलावा दुर्घटना की आशंका वाले क्षेत्रों में गति सीमा कैमरों को लगाना। किसी भी उल्लंघन के लिए वाहनों के चालान ऑनलाइन सिस्टम के माध्यम से स्वचालित रूप से किया होने चाहिए।
जैसे कहा गया है कि गति रोमांचक है, लेकिन जानलेवा है, गति पर लगाम रखनी चाहिए ताकि वाहन पर बेहतर नियंत्रण रहे। यातायात नियमों का पालन करें जिन्हें सुरक्षा को अग्रणी ध्यान में रख कर डिजाइन किया गया है। सीट बेल्ट पहनना चाहिए। पैदल चलने वालों और बच्चों को पहले जाने दें। हमेशा सावधानी के संकेत पढ़ें। कारों में एंटी स्किड ब्रेक सिस्टम को अपनायें। वाहन अच्छा काम करने की हालत में होना चाहिए।सड़कें उचित साइन बोर्ड के साथ-साथ अच्छी हालत में होनी चाहिए। ड्राइविंग करते हुए ड्रग्स और शराब से परहेज किया जाना चाहिए। सड़क सुरक्षा सरकार और लोगों की एक सामूहिक प्रयास है, सरकार या प्रशासन को सड़कों की उचित हालत सुनिश्चित करने और यातायात नियमों को कड़ाई से लागू करने में कोई कसर नहीं रखनी चाहिए। यातायात नियमों के संबंध में लोगों का सही रवैया और जिम्मेदार ड्राइविंग, सड़कों पर 100 प्रतिशत सुरक्षा के लिए लंबी सड़क पर पहला कदम है।
मुझे लगता है कि मुख्य राजमार्ग सड़कों पर सीसीटीवी स्थापित करना, हेलमेट नहीं पहने और वैध लाइसेंस नहीं होने पर नियमित रूप से चालान करना, उपयोगी होगा।
सबसे पहले, सड़कें दो लेन होनी चाहिए और समय पर मरम्मत होनी चाहिए। दूसरे, राज्य में यातायात दुर्घटनाओं को कम के लिए, गति सीमा और नशे में ड्राइवरों की जाँच करने के लिए मुख्य स्टेशन पर यातायात पुलिस होनी चाहिए।
मुझे लगता है कि पुलिस द्वारा ओवरलोडिंग व नशीली दवाओं के दुरुपयोग के लिए जांच होनी चाहिए। शराब पीकर ड्राइविंग को प्रतिबंधित किया जाना चाहिए। देर रात वाहनों की गति पर चेकिंग होनी चाहिए।
मेरे हिसाब से, यातायात को नियंत्रित करने का एक प्रभावी तरीका लोगों में आत्म अनुशासन है। जब तक हम इस प्रणाली का पालन नहीं करेंगे कोई व्यवस्था प्रभावी नहीं होगी। हमें नैतिक आधार पर लगना चाहिए कि हमारी अनुशासनहीनता से अन्य लोगों का जीवन खतरे में पड़ सकता है। मैं यह नहीं कह रहा हूँ कि यहाँ कोई नियम नहीं होना चाहिए, लेकिन इन नियमों के प्रति लोगों की प्रतिबद्धता भी होनी चाहिए। मैने कई बार सड़कों पर देखा है कि स्वार्थी लोग अपने वाहनों को कहीं भी पार्क कर देते हैं, जो अराजकता और अशांति का कारण बनता है। यातायात की समस्याओं को कम करने के लिए यहाँ लोगों के प्रति एक प्रभावी कार्रवाई की जानी चाहिए।
सबसे पहले विश्व स्तर की सुरक्षित सड़कों के निर्माण से और अंत में कड़े यातायात नियमों बनाने के साथ यातायात नियम उल्लंघन पर भारी जुर्माना यातायात की स्थिति को नियंत्रित कर सकते हैं ।
मुझे लगता है कि हमें लोगों और पुलिस कर्मियों को शिक्षित करना चाहिए। यातायात प्रबंधन के लिए अन्य विभागों को भी समान रूप से भाग लेना चाहिए। उचित सड़क डिजाइन और अच्छी गुणवत्ता वाले उत्पादों को सड़क निर्माण के लिए इस्तेमाल किया जाना चाहिए। यहाँ स्कूलों और कॉलेजों में यातायात नियमों का विषय होना चाहिए।
सरकार को सड़कों में सुधार करना चाहिए। विभागों को सूचित कर वाहनों की गति सीमा काप्रदर्शन करना चाहिए। पुलिस / परिवहन विभाग द्वारा रैंडम चेकिंग की जाना चाहिए। विभाग द्वारा ड्राइविंग लाइसेंस देने से पहले सख्त मानकों का पालन करना चाहिए। सरकार की ओर से होर्डिंग्स, टेलीविजन, रेडियो आदि माध्यमों से जागरूकता अभियान की जरूरत है। यातायात अनुशासनहीनता जैसे लाइसेंस के बिना या उच्च गति में ड्राइविंग,विशेष रूप से, शराब पीकर और मोबाइल का उपयोग करते हुए ड्राइविंग, अोवरटेकिंग के रूप में, बिना हेलमेट पहने ,आदि में व्यक्तियों को सख्ती से सजा दी जानी चाहिए। यह बेहतर परिणाम के लिए पर्याप्त होगा। लेकिन सबसे महत्वपूर्ण बात नियमों को हर किसी पर सख्ती से लागू करना है।
मुझे लगता है कि किसी भी सड़क में ड्राइविंग के लिये सामान्य ज्ञान होना चाहिए। राज्य की वर्तमान आर्थिक स्थिति के साथ विश्व स्तर की सड़कों का निर्माण करने के लिए कई साल लग जायेंगे। मुझे लगता है ड्राइविंग लाइसेंस जारी करने की प्रक्रिया में कुछ परिवर्तन होना चाहिए, इसे अाैर कठिन करना चाहिए है। लाइसेंस के लिए लिखित परीक्षा और मनोवैज्ञानिक साक्षात्कार होना चाहिए, ताकि हमें परिपक्व ड्राइवर सकें।मैं राज्य भर में लगभग हजारों किलोमीटर ड्राइव कर चुका हूं, लेकिन परिपक्व ड्राइवर को खोजना मुश्किल है। अधिकांश लोग सड़कों में राजा की तरह वाहन चलाते हैं।
सबसे अच्छा तरीका मोटरसाइकिल सवारों को शिक्षित करना है, सड़क सुरक्षा की भावना पैदा करने के लिए। हमारे स्कूल के शिक्षक सड़कों के उपयोग के नियमों का अच्छा ज्ञान दे सकते हैं।
सरकार को राज्य में सड़कों की स्थिति में सुधार करने की जरूरत है। राज्य के कुछ हिस्सों में सड़कों की स्थिति सबसे खराब है। जो लोग इन सड़कों पर यात्रा कर रहे हैं, बुरी हालत की वजह से यातायात नियमों के खिलाफ जाने के लिए मजबूर हैं और ये अनुशासनहीनता दुर्घटनाओं को कारण बनती हैं। इसलिए मेरे विचार से पहले इन सड़कों को ठीक से मोटर योग्य बनाना है, केवल तभी हम यातायात दुर्घटनाओं को कम करने के बारे में सोच सकते हैं। उचित पार्किंग की जगह भी दुर्घटनाओं की दर कम करने में योगदान कर सकती हैं।
फार्म मशीनरी सड़क को पर अनुमति नहीं दी जानी चाहिए क्योंकि वे सड़क उपयोग के लिए नहीं बने हैं। ड्राइवर यातायात नियमों से अनभिज्ञ हैं इसलिए आरटीओ पर लाइसेंस जारी करने के लिए सख्त नियंत्रण की ज़रूरत है ।
सड़क दुर्घटनाओं को कम किया जा सकता है जब ड्राइवरों को दुर्घटनाओं के कारणों के बारे शिक्षित किया जाएगा, सुरक्षित ड्राइविंग और ड्राइवरों की परिपक्वता से निश्चित रूप से सड़क दुर्घटनाओं में कमी आएगी। दूसरे, उतावली ड्राइविंग और रात में डीप्पर का उपयोग न करना सड़क दुर्घटनाओं को आमंत्रित करता है, जिस बारे में ध्यान देने की जरूरत है। सड़क अनुशासनहीनता की जांच करने के लिए व्यक्ति को पहले चेतावनी दी जानी चाहिए और बाद नियम के अनुसार जुर्माना लगाया जाना चाहिए और अनुशासन केवल तब उत्पन्न किया जा सकता है जब कोई सड़क के नियमों को समझता है।
मेरे हिसाब से लोग लापरवाही से ड्राइव इसलिए करते हैं क्योंकि वे पुलिस के बारे में ज्यादा परवाह नहीं करते। पुलिस को केवल वाहन चालान करने की शक्ति है और चालान की राशि बहुत कम है। यहाँ कुछ सुझाव हैं 1)काफी हद तक चालान की राशि में वृद्धि। 2) एक व्यक्ति को एक ही अपराध दूसरी बार करने पर जुर्माने की राशि में तीन गुना वृद्धि । 3) चौबीसों घंटे निगरानी के साथ प्रमुख सड़क साइटों पर सीसीटीवी रखें। 4) एक व्यक्ति को एक वर्ष में तीन बार से अधिक चालान दिया गया है तो उसकी / उसका ड्राइविंग लाइसेंस रद्द कर दें।
प्रौद्योगिकी से मदद हो सकती है। उच्च तकनीक डी एल और वाहन पुनर्निवेशन प्रौद्योगिकी को विकसित करने की जरूरत है। दुर्घटना ग्रस्त सड़कों या सभी राजमार्ग सड़कों पर स्कैनर स्थापित किया जाना चाहिए जो हमेशा लाइन पर होना चाहिए और विभिन्न स्थानों पर यातायात नियंत्रण कक्षों द्वारा नियंत्रित किया जाना चाहिए। मुश्किल है लेकिन असंभव नहीं। वित्त मदद के लिए, हर सड़क उपयोगकर्ता दान कर सकते हैं अगर राशि 2 अंकों में मांगी जाए।
ड्राइविंग लाइसेंस जारी करने की प्रक्रिया को और अधिक कठिन बना दिया जाना जरूरी है। हर मौजूदा ड्राइविंग लाइसेंस नए मानदंडों के अनुसार एक बार फिर से सत्यापित किया जाना चाहिए। सत्यापन के बाद, अचानक चेक किया जाना चाहिए यदि कोई भी डी/एल अच्छी हालत में नहीं पाया जाता है,तो पुष्टि/जारी करने वाले अधिकारी और डी/एल के मालिक को जिम्मेदार ठहराया जाना चाहिए।
1.व्यक्तियों / सड़क / ड्राइवरों के बीच ड्राइविंग शिष्टाचार पर जागरूकता 2. लोगों को अपने जीवन के मूल्य को समझना चाहिए 3. शराब पीकर ड्राइव और नियम के तहत शराब पीकर ड्राइविंग की दूसरी घटना के बाद लाइसेंस की समाप्ति और ड्राइव नियमों का सख्ती से अनुपालन 4. उचित सड़क चिन्ह और सड़कों का रखरखाव 5. गैर वाणिज्यिक चालकों के लिए राज्य में हिल लाइसेंस अनिवार्य होने की जरूरत है
पहला महत्वपूर्ण मुद्दा ड्राइविंग लाइसेंस के बारे में है। पुलिस को इसके बारे में ध्यान रखना चाहिए और डीएल जारी करने वाले प्राधिकारी को सख्त होना चाहिए। मुझे लगता है ड्राइविंग लाइसेंस जारी करने वाली प्रणाली इसे गंभीरता से नहीं ले रही है।
हर नियम को सख्ती से लागू किया जाना चाहिए। अगर वहाँ कुछ दोषपूर्ण स्थिति हो तो भारी जुर्माना डाल दिया जाए। चालान के लिए उच्च तकनीकी उपकरणों का उपयोग अर्थात उपग्रह से गलत पार्किंग, उच्च गति, गलत पास, गलत कट की स्थिति को देखने के लिए किया जा सकता है।
1) नियमों को पालन करने के लिए सरल और आसान होना चाहिए 2) नियम सबके लिए एक समान होने चाहिए, ये नहीं देखा जाना चाहिए कि गाड़ी काैन चला रहा है या किसकी चला रहा है। 3) हिमाचल प्रदेश में प्रवेश करने वाले वाहनों के चालकों को निर्देश (पत्रक) दिया जाना चाहिए, हिमाचल प्रदेश में सड़कोॆ की स्थिति क्या और कैसे हैं, के बारे में जागरूक किया जाना चाहिए। 4) सरकारी स्तर पर कुछ व्यावहारिक नीति बना कर मालिक/वाहनों के पंजीकरण को प्रतिबंधित किया जाना चाहिए।
1)दुर्घटना की आशंका वाले क्षेत्रों की पहचान करना 2)दुर्घटना ग्रस्त क्षेत्रों का संकेत लगाना 3)गति सीमा निर्धारित करना 4) सड़क इंजीनियरिंग 5)पुलिस शराब पीकर गाड़ी चलाने और तेजी से ड्राइविंग के लिए जाँच करें। 6) सड़क सुरक्षा से संबंधित जन शिक्षा।
यातायात पुलिस को आवश्यक स्थानों पर तैनात किया जाना चाहिए। जब कोई भी नियम की अवज्ञा करे उसे रुपयों के साथ जुर्माना नहीं लगाया जाना चाहिए, बल्कि उसे नियमों की एक विस्तृत कक्षा में भाग लेने के लिए बुलाना चाहिए। और इसे ज़िले में एक स्थान के भीतर विभाग द्वारा स्वयं आयोजित किया जाना चाहिए। तभी दस्तावेजों को चालान प्राधिकारी द्वारा जारी किया जाना चाहिए।
बिना राजनीतिक हस्तक्षेप से कानून को सख्ती से लागू करना और यातायात ड्यूटी कांस्टेबल को वाहन चालान करने का अधिकार होना चाहिए।
सड़क अनुशासनहीनता से, सड़क यातायात प्रशिक्षकों और शिक्षकों द्वारा स्कूल के बच्चों में प्रशिक्षण तथा शिक्षा से, और पुराने चालकों को सुरक्षित ड्राइविंग के सिद्धांतों और यातायात कानूनों के अपने ज्ञान को ताज़ा करने के लिए रिफ्रेशर कोर्स का आयोजन करने से, काफी हद तक बचा जा सकता है। समाचार पत्र, रेडियो, टीवी और अन्य साधनों द्वारा सड़क उपयोगकर्ताओं को , खतरों के लिए और सड़क पर सुरक्षित प्रथाओं के लिए, शिक्षित किया जा सकता है। सड़क दुर्घटनाओं से, उचित और प्रवर्तनीय यातायात कानूनों को, जो एक ही समय में दुर्घटनाओं को रोकने के लिए तैयार हों, को अपनाकर बचा जा सकता है। वाहनों और सड़कों का नियमित और समय पर रखरखाव भी बहुत उपयोगी हो सकता है।
ड्राइवर्स / राइडर्स जैसे ही वह ड्राइव करने लगते हैं, नियमों को भूल जाते हैं। वे केवल गति, गलत सड़क पर से गुजरने और जल्दबाज़ी में ड्राइविंग के बारे में सोचते हैं। घातक दुर्घटनाओं और घातक दुर्घटनाओं के परिणामों से संबंधित होर्डिंग को दुर्घटना के बाद के परिणाम के बारे में ड्राइवरों / सवार को याद दिलाने के लिए सड़कों पर प्रदर्शित किया जाना चाहिए। इसके अलावा ड्राइवरों / सवारों पर जो ड्राइविंग के नियमों को तोड़ते हैं, अधिक जुर्माना लगाया जाना चाहिए ।
यातायात पुलिस का आधुनिकीकरण कर सड़क अनुशासनहीनता की जाँच करें और जो व्यक्ति यातायात नियम तोड़े उसे कड़ी सजा दी जानी चाहिए। ड्राइविंग लाइसेंस जारी करने के लिए सख्त और ईमानदार प्रक्रिया होनी चाहिए।
सड़क अनुशासनहीनता को कम करने में, स्कूलों में नैतिक शिक्षा एक कदम हो सकता है। हमें हमारे बच्चों को रिश्वत, भ्रष्टाचार के खिलाफ और उन्हें कड़ाई से यातायात नियमों का पालन करने के शिक्षित करने की जरूरत है क्योंकि केवल अनुशासन जीवन बचाता है और एक व्यक्ति को सफल बना सकता है ।
इस समस्या और अन्य सभी इसी तरह की समस्याअों के लिए जवाब है कि हम सबको हमारी मानसिकता को बदलने की ज़रूरत है। एक बार जब हम इस मानसिकता को बदलेंगे हमारे समाज में सब चीज़ें क्रम में होंगी। इससे निश्चित रूप से दुर्घटना घटित होने का प्रतिशत कम हो जाएगा।
सरकार को वयस्कों और वाणिज्यिक ड्राइवरों के बीच उनके ड्राइविंग परीक्षण के दौरान जागरूकता बनानी चाहिए। जिलाें को अपनी आधिकारिक वेबसाइट में बड़ी दुर्घटना क्षेत्राें के बारे में एक नया विषय जोड़ना चाहिए। सरकार दुर्घटना बिंदु से खतरनाक क्षेत्रों के बारे में हर पर्यटक को एक पुस्तिका वितरित करनी चाहिए। पुलिस को इन क्षेत्रों में संतुलन और जांच के बारे में विशेष प्रशिक्षण प्रदान करना चाहिए। यातायात पुलिस विभाग को अत्यधिक खतरे वाले क्षेत्रों के बारे में होर्डिंग जारी करने चाहिए।
लोगों को विभिन्न विज्ञापनों के माध्यम से असुरक्षित ड्राइविंग के खतरों से अवगत कराया जाना चाहिए। स्कूली बच्चों को लोगों को संदेश देने के लिए शहरों में उतारा जा सकता है । हालांकि सरकार को सड़क की स्थिति के बारे में कुछ करना चाहिए। सड़कों की हालत बहुत खराब है और इनका सुधार सड़क सुरक्षा के लिए आवश्यक हैं।
ड्राइविंग लाइसेंस जारी करने से पहले, सरकार द्वारा चलाए जा रहे ड्राइविंग प्रशिक्षण संस्थान में सड़क सुरक्षा और सुरक्षित ड्राइविंग पर कम से कम 3 से 7 दिनों का प्रशिक्षण अनिवार्य बनाया जाना चाहिए।
पुलिस विभाग और सख्त होने की जरूरत है अाैर सड़क सुरक्षा और नियमों पर लोगों को जागरूक करना चाहिए। पुलिस स्कूलों में या शहरों के मुख्य केंद्रों में जागरूकता शिविरों का आयोजन कर सकती है। हेलमेट और सीट बेल्ट पहनना अनिवार्य बनाया जाना चाहिए। पार्किंग क्षेत्रों का अंकन विशेष रूप से बसों के लिए उपयोगी होगा।
दुर्घटना की आशंका वाले क्षेत्रों पर सीसीटीवी लगाए जाने चाहिए। सड़क पर खड़े मानव रहित वाहनों को तुरंत पुलिस द्वारा हटाया जाना चाहिए। लोक निर्माण विभाग को उनकी गलती की वजह से दुर्घटना मामलाें में पार्टी बनाया जाना चाहिए। पुलिस द्वारा जन जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किये जाने चाहिए।
हर नियम को सख्ती से लागू किया जाना चाहिए। सड़कें दो लेन हो और समय पर मरम्मत होनी चाहिए। इसके अलावा गति सीमा तय करें। दुर्घटना की आशंका वाले क्षेत्रों में कैमरे लगाये जाने चाहिए। किसी भी उल्लंघन के लिए वाहनों के चालान स्वचालित रूप से ऑनलाइन सिस्टम के माध्यम से किये जाने चाहिए।
अधिकांश लोगों को यातायात नियमों का पता है, लेकिन उनका पालन नहीं करते हैं और इसी समय यातायात पुलिस को चालान की संख्या अधिकतम कर उन्हें सख्ती से नियमों का पालन करने की जरूरत महसूस करवानी चाहिए। इससे राज्य को राजस्व की प्राप्ति के साथ यातायात दुर्घटनाएें कम करने में मदद मिलेगी।
हेलमेट / सीट बेल्ट, सड़क संपर्क, शराब पीकर गाड़ी चलाने, काले धब्बों की पहचान, लाइसेंस जारी करने की प्रक्रिया है, गति सीमा, सीसीटीवी कैमरे आदि की स्थापना के मुद्दों के अलावा, सरकार को सड़क के किनारे अपेक्षित पार्किंग पर व्यावसायिक गतिविधियों को अनुमति न देने पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। जैसे कि सड़क के किनारे पर्याप्त पार्किंग की जगह ऑटो मरम्मत की दुकानें ट्रैफिक जाम की कारण बनती हैं। प्रख्यात व्यक्तियों को, जिन्होंने सड़क दुर्घटनाओं में अपनी जान गंवाई और जिसका कारण अन्य वाहनों द्वारा गलत पार्किंग था,याद करना चाहिए।
चालक को गिरफ्तार कर लिया जाना चाहिए यदि नशे में गाड़ी चलाते हुए पाया जाये। दुर्घटनाओं का सबसे बड़ा कारण शराब पीना बनता है। वहीं ड्राइविंग लाइसेंस जारी करने के लिए, सख्त परीक्षणों का आयोजन किया जाना चाहिए। समझौता फीस में भारी वृद्धि भी, पार्किंग में उल्लंघन, तेज़ गति और लापरवाह ड्राइविंग के ऊपर लगाम लगा सकती है। राज्य सरकार को भी जनता की सुविधा के लिए सामरिक बिंदुओं पर पार्किंग की जगह उपलब्ध करानी चाहिए।
हर रोज सड़कों के विभिन्न बिंदुओं पर जाँच की जानी चाहिए। शराब, चालक की उम्र, मोबाइल बंद रखा जाता है, संगीत चलाया जा रहा है, यह सब पुलिस विभाग के ईमानदार कर्मचारियों द्वारा दैनिक जाँच की जानी चाहिए।
मेरी राय में निम्नलिखित उपाय कर सकते हैं। कई नए और पुराने काले धब्बे राज्य भर में साफ़ तौर पर चिह्नित किया जाने की जरूरत है। तेज़ मोड़ों को चौड़ा किया जाना चाहिए। जो लोग बसें चला रहे हैं उनकी नशे के लिए नियमित रूप से जाँच की जानी चाहिए। निजी बसें अधिक यात्रियों को ले जाने की प्रतियोगिता में बहुत तेजी से चलती हैं, यह कई दुर्घटनाओं की कारण है, इन पर भारी जुर्माना अाैर जाँच की जानी चाहिए। वाहनों के चालान न केवल मार्च में बल्कि साल भर होने चाहिए।
सबसे पहले सड़कों की स्थिति में सुधार होना चोहिए। मुझे लगता है कि सड़कों की हालत राज्य में यातायात दुर्घटनाओं को कम करने में मदद कर सकती हैं। सड़क सुरक्षा के बारे में चालकों को जागरूक किया जाना चाहिए। हमारे देश में लोग यातायात नियमों, जो दुर्घटनाओं का सबसे कारण हैं, को तोड़ने में गर्व महसूस करते हैं। एक पत्रिका जिसमें दुर्घटनाओं की संख्या के बारे में, दुर्भाग्य से दुर्घटनाओं में मारे गए के लोग,दुर्घटनाओं की तस्वीरोंके साथ-साथ हैं,पीड़ितों के विचारों को राज्य में मुद्रित किया जाना चाहिए और राज्य में सभी लाइसेंस धारकों को वितरित किया जाना चाहिए। अंत में यह हमारे पूरे समाज की जिम्मेदारी कि हम उन लोगों पर प्रकाश डालें जो सड़कों पर अनुशासनहीनता बनाते हैं ।
सूचना प्रौद्योगिकी और इलेक्ट्रॉनिक प्रौद्योगिकी को यातायात दुर्घटनाएें कम करने के लिए प्रयोग किया जाना चाहिए।सड़क को चौड़ा उाैर पक्का बनाने के लिए अधिक ज़ोर दिया जाना चाहिए।लाइसेंस देने के लिए लाइसेंस नीति में सुधार किया जाना चाहिए क्योंकि कई दुर्घटनाएें चालक की लापरवाही के कारण घटित होती हैं ।यातायात नियमन ड्यूटी के लिए यातायात कर्मचारियों को और अधिक शक्ति तथा ईमानदार यातायात पुलिस कर्मी तैनात किए जाने चाहिए।इसके अलावा संवेदक, गति जाँच उपकरण यातायात पुलिस को उपलब्ध किए जाने चाहिए।
हमें ड्राइवरों के साथ ही पुलिस को जागरूक करने की जरूरत है।सुधारात्मक तरीके उपयोगी साबित नहीं हो सकते। लाइसेंस देते समय चालकों को यातायात नियमों और खराब ड्राइविंग के परिणामों से अवगत कराया जाना चाहिए।प्रमुख की जाने वाली गलतीयां हैं: पूरी गति से मोड़ काटना।गलत साइड पर ड्राइविंग।मोड़ पर दूसरी तरफ से आने वाले वाहनों को जगह न देना ।मोड़ पर अोवरटेकिंग।उच्च बीम के साथ वाहन ड्राइविंग। शराब पीकर चलाना।इनमें से अधिकांश समस्याएें अज्ञान से संबंधित हैं।दंड के साथ-साथ उचित जागरूकता लाई जानी चाहिए ताकि बहुतों के जावम को बचाया जा सके।
यातायात नियमों के क्रियान्वयन को सड़क सुरक्षा पर लोगों को शिक्षित और ड्राइविंग लाइसेंस जारी करने से पहले सड़क सुरक्षा पर प्रशिक्षण के अलावा छात्रों के साथ नियमित बातचीत की एक योजना बनाकर प्रभावी बनाया जा सकता है।
हमें सड़क भावना के बारे में लोगों को शिक्षित करना चाहिए।यह स्कूलों और अन्य शैक्षिक संस्थानों और सड़क के किनारे पर नुक्कड़ शो में कार्यशालाओं का आयोजन करके किया जा सकता है।फिर भी हमें ठोस परिणाम नहीं मिल रहा है तो हमें भारी हाथों से सड़क अनुशासनहीनता के अपराधियों के साथ निपटना चाहिए ।
अधिकांश दुर्घटनाएें तेज़ गति के कारण होती हैं इसलिये विभिन्न स्थानों पर गति जाँच मशीनें के लिए साथ पर, यातायात पुलिस द्वारा शराब पीकर गाड़ी चलाने की जाॅंच और हिमाचल प्रदेश परिवहन प्राधिकरण द्वारा लाइसेंस देने से पहले उचित प्रशिक्षण का प्रावधान होना चाहिए।
हम भारतीय अब भी पूरी तरह से जिम्मेदार नागरिक के रूप में विकसित नहीं हो पाये हैं, इस बुराई को रोकने के लिए नियमित रूप से पुलिस गश्त और चेक जरूरी है। जब तक कानून का डर है कि हम नियमों का पालन नहीं कर सकते। शराबी चालकों के लाइसेंस तुरंत रद्द किये जाने चाहिए। अल्पवयस्क ड्राइविंग पर बहुत भारी जुर्माना लगाया जाना चाहिए। तेज गति को एक गंभीर अपराध के रूप में देखा जाना चाहिए और उसके अनुरूप काम होना चाहिए।
राजमार्गों पर सीसीटीवी कैमरा, तेज़ गति, बंदरों को खिलाने, शराब पीने और मोड़ पर अोवरटेकिंग की जाँच के लिये लगने चाहिए।सड़क में पार्किंग, जो अन्य वाहनों की अावाजाही में बाधा डालती, को रोका जाना चाहिए। सभी चालकों को हर छह महीने में एक बार, एक दिन विशेष चालन प्रशिक्षण से गुजरना होगा। सभी वाहन मालिकों को करों का भुगतान करने की हिदायत दी जानी चाहिए।
इस तरह के मामले में बड़ा जुर्माना लगा के बकाएदारों के नाम ई-बोर्डों के माध्यम से सार्वजनिक स्थानों पर प्रदर्शित किये जाने चाहिए या समाचार पत्रों में बोल्ड फोंट में मुद्रित किये जाने चाहिए। इस तरह की गंभीर सजा दूसरों को यातायात नियमों की अवज्ञा न करने के लिए उदाहरण बन सकती है। नियमों को सभी के लिए सख्ती से लागू होना चाहिए।
बाइक आदि की गति और स्टंट दिखाने वाले भ्रामक और महिमामयी विज्ञापनों पर प्रतिबंध लगा दिया जाना चाहिए।जनता को ड्राइविंग की अच्छी आदतों के बारे में अवगत कराया जाना चाहिए।सड़कों में ठीक से, डिवाइडर, लेन, ठहराव व पैदल चलने वालों आदि के लिए क्षेत्र , चिह्नित किये जाने चाहिए।ड्राइवरों का केवल कागजात में ही नही, सही मायनों में ड्राइविंग परीक्षण किया जाना चाहिए ।यातायात नियमों के उल्लंघन के लिए कड़े दंड होने चाहिए।
अधिकांश मामलों में,तेज़ गति दुर्घटनाओं का मुख्य कारण होती है।तेज़ गति का मूल कारण बस ऑपरेटरों द्वारा किसी और बस से पहले अधिकतम यात्रियों को ले जाना होता है।परिवहन विभाग तेज गति कम करने के लिए परिणाम उन्मुख नीतियों को बनाने के लिए जिम्मेदार है।नशा, सड़कों की खराब स्थिति, वाहनों की खस्ता यांत्रिक हालत, घटिया ड्राइविंग, आवारा पशु, मोबाइल फोन का उपयोग, दुर्घटनाओं के लिए एक अन्य प्रमुख कारक है, जिस पर सरकार को गंभीरता से सोचने की जरूरत है।
पहले हमें सड़कों की दयनीय हालत में सुधार करने की जरूरत है।सबसे खतरनाक सड़कों में गति रोधक और ठोस पैराफीट्स रखे जाने चाहिए और उग्र ड्राइविंग पर ड्राइविंग लाइसेंस रद्द करने चाहिए और हमारी पुलिस द्वारा वैध लाइसेंस और आईडी प्रूफ के लिए व्यक्तियों होनी चाहिए।संकीर्ण सड़कों को व्यापक और जल निकासी व्यवस्था उचित स्थिति में होना चाहिए। उग्र चालकों या यातायात नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ दया दिखाने की कोई जरूरत नहीं है।
सार्वजनिक परिवहन के मामले में, ड्राइवर की ड्यूटी के घंटे तय किये जाने चाहिए और अतिरिक्त समय की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए, ताकि चालक उचित आराम ले सकें।कई लोगों का जीवन ड्राइवर पर निर्भर करता है और उन्हें इस तथ्य के बारे में पता होना चाहिए।सरकार के अधिकारियों द्वारा बसों का उचित रखरखाव सुनिश्चित किया जाना चाहिए।
हिमाचल प्रदेश में सड़कों में बहुत सुधार हुआ है, लेकिन समस्या यह है कि नई प्रौद्योगिकी व उच्च गति के वाहनों में मैदानी सड़कों में कुछ किलोमीटर की दूरी, जहां ड्राइवरों में तेजी से चलाने लिए होड़ होती है। इन उच्च गति वाहनों पर जाँच रखी जानी चाहिए।दूसरे, दो पहिया वाहन खाली सड़कें की खोज मोड़ों पर तेजी लाने, यहां तक कि सड़कों के गलत साइड पर ड्राइव करने के लिए करते हैं।
यदि वाहन पर नशे में पाया जाये तो चालक को गिरफ्तार कर लिया जाना चाहिए।शराब पीना दुर्घटनाओं का सबसे कारण बनता है।ड्राइविंग लाइसेंस जारी करते समय सख्त परीक्षणों का आयोजन किया जाना चाहिए।इस बुराई को रोकने के लिए नियमित रूप से पुलिस गश्त और जांच जरूरी है। यातायात पुलिस को अपेक्षित स्थानों पर तैनात किया जाना चाहिए।
पुलिस को किसी हस्तक्षेप के बिना अपने कर्तव्य का पालन करने की अनुमति दी जानी चाहिए।प्रभावशाली लोग टैक्स मुक्त जाने का रास्ता खोज लेते हैं।तो पुलिसकर्मीयों में भी समर्पण के साथ अपने कर्तव्य का पालन करने की परवाह नहीं है।कभी कभी उन्हें भी अपने कर्तव्य का निष्पादन करने के लिए कठिन समय का सामना करना पड़ता है।कुछ का तबादला हो कर दिया जाता है, कुछ को डांटा जाता है, तो क्यों वे यह सब करें, जबकि कोई मान्यता न हो कर केवल अवसाद है।
कई बार मैंने देखा है कि जिन व्यक्तियों को यातायात पुलिस कर्मी बहुत अच्छी तरह से जानते हैं कि बिना हेलमेट के चला रहे होते हैं, लेकिन उन्हें कोई भी नहीं रोकता।ये लोग नियमों का उल्लंघन करते हैं और दुर्घटना का कारण बनते हैं।
सबसे पहले, यातायात पुलिस को घटिया यंत्रो से सुसज्जित किया जा रहा है और खराब स्टाफ के साथ साथ उनकी उपस्थिति जहां कहीं आवश्यक है, जरूरत से काफी कम है।स्वत: संकेतों की स्थापना और सीसीटीवी कैमरे भी स्थिति को सुधारने का काम करेंगे।यह भी देखा गया है कि पार्किंग की जगह के अभाव से लोग सार्वजनिक जगहों पर वाहनों को पार्क करने के लिए मजबूर हैं, उन्हें रोकने की स्थिति में सुधार नहीं हुआ है।एक पहाड़ी क्षेत्र होने के नाते है हमें शांति से ड्राइव करना चाहिए।
सब से पहले हमें लोगों को, जो ड्राइव करते हैं, अपने नैतिक कर्तव्यों के साथ-साथ यातायात नियमों का पालन करने के लिए प्रेरित करने की जरूरत है। यदि हर एक अपने कर्तव्यों का ईमानदारी से पालन करता है तो दुर्घटनाएें होंगी ही नहीं ।एक और बात, एक 18 साल की उम्र से पहले ड्राइविंग से बचना चाहिए, इससे यातायात दुर्घटनाओं में कमी हो सकती है।
वर्तमान में सभी अखबारें दुर्घटनाअों की खबर के साथ भरी रहती हैं।इसे कम करने के लिए, पुलिस द्वारा डिफॉल्टर के खिलाफ सख्त और कड़ी कार्रवाई करनी बहुत आवश्यक है।एक किशोर या वयस्क ड्राइविंग लाइसेंस के बिना पाया जाता है, उसे अदालत में भेजा जाये और उसे 10 दिनों की जेल की सज़ा के साथ भारी जुर्माना लिया जाये।मेरा एक और सुझाव है, एक सप्ताह में डिफॉल्टर का एक समूह बना कर उनसे रविवार को अस्पतालों, सड़कों पर गंदगी, या अन्य सरकारी संपत्ति की सफाई करवाएें। इससे डिफॉल्टर को निश्चित रूप से दोषी होने का एहसास होगा और शर्म महसूस होगी।
मेरी राय में, हर व्यक्ति को ड्राइविंग करते हुए काम की संवेदनशीलता इस का पता होना चाहिए।अगर मूर्खतापूर्ण ढंग से ड्राइविंग करेंगे तो निश्चित रूप से दूसरों को नुकसान होगा।हालांकि ड्राइविंग लाइसेंस जारी करते समय हर व्यक्ति को सावधानी और सुरक्षित ड्राइविंग के बारे में पूरी तरह से अवगत कराया जाना चाहिए।
पुलिस की छवि यातायात पुलिस में महिलाओं की भर्ती के साथ सुधरी है, लेकिन पुलिस को कानून के दूसरे पक्ष पर चालकों के साथ सख्त होने की जरूरत है। चालान राशि में वृद्धि की जानी चाहिए।
ट्रैफिक पुलिस को हर समय सड़कों पर होना चाहिए।जांच यादृच्छिक आधार पर नहीं होनी चाहिए।ट्रैफिक पुलिस को अच्छी तरह से सुसज्जित किया जाना चाहिए।सभी वाहनों की गति सीमा को या तो कैमरों की मदद से या किसी अन्य संभव तरह से नियंत्रित किया जाना चाहिए।सबसे अधिक दुर्घटनाएें क्षतिग्रस्त सड़क के कारण होती हैं, इसलिए किसी भी सड़क दुर्घटना के लिए डिफॉल्टर की जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए।सभी सड़कों यार्ड स्टिक/मानकों के अनुसार मरम्मत किया जाना चाहिए आंशिक रूप से नहीं।
गति सीमा की जांच शहरों के साथ-साथ राजमार्गों पर भी होनी चाहिए। ड्राइवरों की मानसिक अाैर शारीरिक स्थिति की नियमित रूप से जाँच होनी चाहिए।ड्राइवरों पर गलतियों को दोहराने पर भारी जुर्माना लगाया जाना चाहिए।बार-बार चूककर्ताओं के लाइसेंस कुछ समय के बाद रद्द कर दिए जाने चाहिए।अच्छी पार्किंग की जगह उपलब्ध कराई जानी चाहिए।
पर्यटक कारें / वाहन द्वारा उच्च गति ड्राइविंग की भारी चालान के माध्यम से यातायात पुलिस द्वारा जाँच की जरूरत है।ऐसे ड्राइवर अन्य कानून का पालन करने वाला सड़क उपयोगकर्ताओं की यात्रा के लिए असुरक्षित हैं।अोवरटेकिंग करते हुए लेन अनुशासन लागू किया जाना चाहिए।
हमारे यातायात पुलिस कर्मीयों को स्पीडोमीटर, डॉपलर रडार, आदि उपकरणों से वाहन चालक की अनुशासनहीनता की जाँच करने में सशक्त बनाना चाहिए।
राज्य में यातायात पुलिस कर्मियों की कमी के कारण, सरकार को सभी प्रमुख स्थानों में और दुर्घटना की आशंका वाले क्षेत्रों में सीसीटीवी कैमरे स्थापित करने और विशेष रूप से ड़क के किनारे पर बड़े बैनर यह कहते हुए कि आप निगरानी में है, लगाने चाहिए।पुलिस को सभी प्रमुख स्थानों में नियमित रूप से नाके लगाने चाहिए।
सड़कों को सफेद और पीले रंग की लाइनों के साथ ठीक से चिह्नित किया जाना चाहिए।अोवरटेकिंग के लिए जगह सुनिश्चित होनी चाहिए तथा सीसीटीवी कैमरा से निगरानी होनी चाहिए।
मोबाइल फोन पर बात करते हुए ड्राइविंग दुर्घटनाओं का मुख्य कारण है।अगर किसी को भी पकड़ा जाए उसे दंडित किया जाना चाहिए।
सड़क सुरक्षा के लिए / इंजीनियर ग्रेड चिंतनशील एल्यूमीनियम सड़क संकेत इंजीनियर ग्रेड सांक्षेत्रिक चिंतनशील संकेत, उच्च तीव्रता सांक्षेत्रिक चिंतनशील संकेत या हीरा ग्रेड प्रतिदीप्त प्रिज्मीय सड़क संकेत स्थापित करें।ये संकेत दिन और रात के समय काम करने चाहिए।
सभी ड्राइवरों को यातायात संकेतों, यातायात वार्डन, ट्रैफिक लाइट के बारे में ज्ञान होना जाना चाहिए। सड़क शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में युवाओं के बीच जागरूकता पैदा करनी है।चालान द्वारा अनावश्यक रूप से होर्न का इस्तेमाल से ध्वनि प्रदूषण से बचें।ट्रैफिक पुलिस को गति बंदूकें, गति अरेस्टर जैसी की तरह नई प्रौद्योगिकियों का उपयोग करना चाहिए।
सड़क पर हर वाहन से यातायात नियमों के संबंध में समान रूप से व्यवहार किया जाना चाहिए और यदि उनके द्वारा नियमों टूट रहे हैं, तो भारी जुर्माना लगाया जाना चाहिए, चाहे वो लाल बत्ती ही क्यों न हो।
सड़क पर उपस्थित हर व्यक्ति के लिए जगह प्रदान करें।हमें पार्किंग और पैदल चलने वालों के लिए फुटपाथ के लिए स्थान उपलब्ध कराना चाहिए।अनुशासनहीनता के लिए चालान या वाहनों को जब्त करने के माध्यम से सख्त कार्रवाई और जाँच की जानी चाहिए।
सभी फुटपाथों को चलने के योग्य बना कर लोगों को उन्हें इस्तेमाल करने के लिए प्रोत्साहित करें।ड्यूटी पर तैनात पुलिस अधिकारी किसी भी वाहन के बीच भेदभाव नहीं करना चाहिए तथा अधिक भार तथा तेज गति पर चाहिए आवश्यक कार्रवाई के लिए उनके तत्काल अधिकारी को रिपोर्ट करना चाहिए।उचित पार्किंग के अभाव में सड़क की ओर पार्किंग को विनियमित किया जाना चाहिए। अल्पअायु चालकों पर उचित जांच की जानी चाहिए और इस तरह के संदिग्ध लोगों के लाइसेंस का सत्यापन भी होना चाहिए।हाथ आयोजित गतिबंदूकों का गति सीमा की जांच करने के लिए इस्तेमाल किया जाना चाहिए।सबसे महत्वपूर्ण, सभी में सुरक्षित ड्राइविंग की भावना जगाने लिए सख्ती से कानून को लागू करना चाहिए।
नशे में ड्राइविंग सड़क दुर्घटनाओं का प्रमुख कारण है।नशे में ड्राइवरों पर जांच सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाने में बहुत योगदान कर सकती हैं।
दुर्घटनाओं का पहला और सबसे महत्वपूर्ण कारण शराब की खपत है।अगर हम इस विशेष समस्या की जाँच करें तो दुर्घटना दर निश्चित रूप से नीचे चली जाएगी।पुलिस चेक पोस्ट क्षेत्र की परवाह किए बगैर लोग शराब पीकर ड्राईविंग के मामले में पकड़े जाएें, उनकी जाँच की जानी चाहिए।
ड्राइविंग करते समय मोबाइल पर बात कर रहे व्यक्तियों पर भारी जुर्माना लगाया जाना चाहिए।ओवरलोडिंग और तेज गति की जाँच करने के लिए एक निश्चित दूरी पर हर राजमार्ग पर कैमरा निहित होना चाहिए।पहाड़ियों में चलने वाली सभी बसों में गति गवर्नर्स होने चाहिए।जाम में, उल्लंघन करने वालों को चेतावनी नहीं दी जानी चाहिए बल्कि तुरंत चालान होना चाहिए।
चूककर्ता ड्राइवरों को दोष देने के अालावा उनकी लाइसेंस फीस बढ़ानी चाहिए।यह शुल्क हर साल उनसे वसूला जाना चाहिए।अगर वो फिर से गलती करें उनका लाइसेंस रद्द कर दिया जाना चाहिए।
यह भीड़ भरे क्षेत्रों के पास यातायात पुलिस की पोस्ट में वृद्धि, वाहनों के लिए पार्किंग की उचित जगह बनाकर कम किया जा सकता है।जनता के लिए जागरूकता संगोष्ठी का करें ताकि जनता यातायात नियमों के टूटने और तेज गति की सीमाओं को समझें।पुलिस को इस समस्या के बारे में और अधिक सख्त होने की जरूरत है, उसके बाद ही हम यातायात दुर्घटनाओं को नियंत्रित कर सकते हैं ।
हर कोई दिन के दौरान सड़क सुरक्षा के बारे में सही बात करता है, लेकिन मुझे लगता है कि उच्च बीम के साथ रात में ड्राइविंग समाज के लिए एक वास्तविक खतरा हैं।कुछ इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों / गैजेट्स से चूककर्ताओं को टैग करके सड़क सुरक्षा को बढ़ावा देने में एक लंबा रास्ता तय करना होगा ।इसके अलावा कुछ दिनों के लिए ड्राइविंग पर पाबंदी और भारी जुर्माना लगाने से एेसे ड्राईवरों को ठीक करने में मदद मिलेगी ।
गति सीमा की जांच शहरों में और साथ ही राजमार्गों पर होनी चाहिए।ड्राइवरों की शारीरिक अाैर मानसिक स्थिति की नियमित रूप से जाँच की जानी चाहिए।ड्राइवर, जो गलतियों को दोहराते हैं, पर भारी जुर्माना लगाया जाना चाहिए।बार-बार चूककर्ताओं के लाइसेंस कुछ समय के बाद रद्द कर दिये जाने चाहिए।पार्किंग की जगह उपलब्ध कराई जानी चाहिए।
हमें लोगों को परिवहन प्रणाली और सड़क पर कैसे व्यवहार करें, के बारे में शिक्षित करने की जरूरत है।सरकारी स्कूलों में छात्रों के लिए सड़कों और सुविधाएं (पार्किंग, फुटपाथों आदि)के सुधार अाैर परिवहन पर एक विषय की स्थापना करनी चाहिए, बच्चों को गाइड करने के लिए माता-पिता की भागीदारी होनी चाहिए।पुलिस को चूककर्ताओं के खिलाफ सख्त कार्रवाई करनी चाहिए।
हमें सड़क सुरक्षा नियमों के प्रति सख्त होने की जरूरत है।उदाहरण के लिए, वाहन बाध्य, लाइसेंस निलंबन और कारावास की सजा।ताकि लोग किसी भी नियम को तोड़ने से पहले दो बार सोचें।उपरोक्त नियमों के बेहतर कार्यान्वयन के लिए प्रौद्योगिकी उपयोगी हो सकती है, जैसे ड्राइविंग लाइसेंस डिजिटल होना और लाइसेंस जारी करने की प्रक्रिया न केवल कागजात पर, बल्कि वास्तविक में व्यापक होनी चाहिए।